कोई टाइटल नहीं





क्यों हर पल मुझे आजमाती है ये ज़िन्दगी
क्यों खुश मुझे देख पाती नहीं ये ज़िन्दगी
रोज़ मुझे रुलाने को गम जाने कहा से ढूंढ के लाती है ये ज़िन्दगी
हर वक़्त एक सौतन की तरह जलाती है मुझे ये ज़िन्दगी !!!!!!

NISHI

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